जब विष्णु जी ने दिया ऐसा वरदान कि बदल गई पूरी सृष्टि की व्यवस्था

एक दिन की बात है।
भगवान विष्णु शेषनाग पर विराजमान थे। क्षीरसागर की शांति में वे विश्राम कर रहे थे।

तभी उनकी अर्धांगिनी माता लक्ष्मी ने मुस्कुराते हुए कहा —

“प्रभु, मैं आपकी इतनी सेवा करती हूँ, आपका ध्यान रखती हूँ, पर आपने मुझे कभी कोई विशेष उपहार नहीं दिया।”

विष्णु जी ने सोचा — बात तो सही है।
उन्होंने प्रेम से कहा — “देवी, मांगिए क्या चाहती हैं?”

लक्ष्मी जी ने कहा —
“मैं जब चाहूँ, जिसको चाहूँ, पृथ्वी पर जितना धन देना चाहूँ, दे सकूँ।”

विष्णु जी ने कहा — तथास्तु।
परंतु एक शर्त के साथ।

“आप धन दे सकती हैं, लेकिन जब मैं चाहूँ, मैं उसे वापस ले सकता हूँ।”

लक्ष्मी जी ने स्वीकार किया।


देव लोक में मचा हलचल

यह समाचार देवलोक में फैल गया।
जब यह बात माता सरस्वती तक पहुँची, तो उन्हें लगा —

“यह तो अनुचित है! लक्ष्मी को इतना बड़ा वरदान मिला, मेरा क्या?”

वह सीधे विष्णु जी के पास पहुँचीं।
विष्णु जी और सरस्वती जी का संबंध भाई-बहन जैसा माना जाता है।

सरस्वती जी ने कहा —
“मुझे भी वरदान चाहिए, और जो भी मिले — लक्ष्मी से बेहतर होना चाहिए।”

विष्णु जी मुस्कुराए।
उन्होंने कहा —

“मैं आपको यह वरदान देता हूँ कि आप पृथ्वी पर जिस मनुष्य को जितना ज्ञान देना चाहें दे सकती हैं — और उस ज्ञान को मैं भी कभी वापस नहीं ले पाऊँगा।”


यही कारण है – धन चंचल, ज्ञान स्थायी

यहीं से सृष्टि का संतुलन तय हुआ।

🌸 लक्ष्मी चंचला क्यों?

क्योंकि धन पर विष्णु जी का नियंत्रण है।
वह आता है, जाता है, बदलता है।

आज है — कल नहीं।
राजा रंक बन सकता है।
व्यापारी कंगाल हो सकता है।

धन अस्थायी है।

📚 सरस्वती स्थायी क्यों?

ज्ञान एक बार आ गया — तो कभी छिन नहीं सकता।

किसी का पैसा छिन सकता है
पर सीखी हुई विद्या नहीं।


आध्यात्मिक संदेश

यह कथा हमें सिखाती है:

  • धन का अहंकार मत करो।
  • ज्ञान को सर्वोच्च मानो।
  • लक्ष्मी के पीछे भागोगे तो वह भागेगी।
  • सरस्वती को अपनाओगे तो लक्ष्मी स्वयं आएगी।

जीवन में इसका प्रयोग कैसे करें?

  1. पहले ज्ञान अर्जित करें।
  2. कौशल सीखें।
  3. आत्मविकास करें।
  4. धन स्वयं आकर्षित होगा।

यही कारण है कि बड़े संत पहले शिक्षा पर बल देते थे।


गहरा आध्यात्मिक विश्लेषण

विष्णु — संतुलन के देवता
लक्ष्मी — संसाधन
सरस्वती — चेतना

यदि केवल धन हो और ज्ञान न हो — विनाश होता है।
यदि केवल ज्ञान हो और धन न हो — संघर्ष होता है।

पर जब दोनों संतुलित हों — तब समृद्धि आती है।


आधुनिक जीवन में यह सत्य

आज के समय में भी देखें —

  • जिसने शिक्षा ली, वह बार-बार सफल हुआ।
  • जिसने केवल पैसा कमाया पर कौशल नहीं सीखा — उसका पैसा गया।

ज्ञान कम्पाउंड इंटरेस्ट की तरह है।
धन स्टॉक मार्केट की तरह है।


निष्कर्ष

इसीलिए कहा गया है —

“विद्या धन सर्वश्रेष्ठ धन है।”

लक्ष्मी जी आती-जाती रहेंगी।
पर यदि सरस्वती जी का आशीर्वाद है —
तो लक्ष्मी कभी स्थायी रूप से दूर नहीं जाती।


FAQ (SEO Ranking के लिए)

Q1. लक्ष्मी जी चंचल क्यों कहलाती हैं?

क्योंकि उनके वरदान में धन देने की शक्ति है, पर विष्णु जी उसे वापस ले सकते हैं।

Q2. क्या ज्ञान कभी छिन सकता है?

नहीं, सरस्वती जी के वरदान अनुसार ज्ञान स्थायी है।

Q3. पहले धन कमाना चाहिए या ज्ञान?

शास्त्र अनुसार पहले ज्ञान, फिर धन।

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