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21 दिन का विशेष साधना नियम
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त अनेक प्रकार के उपाय करते हैं —
कोई जल अर्पित करता है, कोई रुद्राभिषेक करता है, कोई महामृत्युंजय मंत्र का जाप करता है, तो कोई विभिन्न मंत्रों और साधनाओं से भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करता है।
लेकिन आज हम एक ऐसे सरल दिखने वाले, परंतु अत्यंत शक्तिशाली संकल्प और मंत्र की बात कर रहे हैं —
जिसे हर कोई पूरा नहीं कर पाता।
यह साधना साधारण नहीं है।
यह केवल वही व्यक्ति कर सकता है जिसके भीतर दृढ़ संकल्प, श्रद्धा और अनुशासन हो।
🕉️ मंत्र
“ॐ वर्धनाय नमः”
यह मंत्र अत्यंत सरल है।
इसे कहीं भी जपा जा सकता है।
लेकिन इसकी वास्तविक शक्ति तब जागृत होती है जब इसे संकल्प के साथ किया जाए।
🌊 साधना की विधि
- एक दृढ़ संकल्प लें कि आप प्रतिदिन भगवान शिव के मंदिर जाएंगे।
- शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित करेंगे।
- जल अर्पित करते समय “ॐ वर्धनाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करेंगे।
- यह क्रम लगातार 21 दिन तक बिना किसी रुकावट के पूरा करना होगा।
⚠️ क्यों है यह साधना कठिन?
कहा जाता है कि जब भी कोई साधक सच्चे मन से संकल्प लेता है, तो उसकी परीक्षा अवश्य होती है।
- अचानक व्यस्तता
- शारीरिक थकान
- मानसिक भ्रम
- छोटी-छोटी बाधाएं
कुछ न कुछ ऐसा अवश्य आता है जो साधना को रोकने का प्रयास करता है।
इसीलिए यह साधना हर कोई पूरी नहीं कर पाता।
लेकिन जिसने 21 दिन बिना टूटे यह जाप पूर्ण कर लिया — समझिए उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा हो चुकी है।
🔮 इस मंत्र का आध्यात्मिक अर्थ
“वर्धनाय” का अर्थ है — वृद्धि करने वाला, उन्नति देने वाला।
यह मंत्र जीवन में:
- आत्मबल बढ़ाता है
- सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है
- आध्यात्मिक उन्नति देता है
- कार्यों में वृद्धि और सफलता लाने में सहायक होता है
🔔 विशेष संकेत
यदि 21 दिन पूरे हो जाएँ और कोई बाधा न आए —
तो इसे भगवान शिव का संकेत माना जाता है कि आपकी साधना स्वीकार हो चुकी है।
✨ निष्कर्ष
भोलेनाथ सरल हैं, लेकिन उनकी कृपा पाने के लिए सच्ची निष्ठा और दृढ़ता आवश्यक है।
यह 21 दिन का संकल्प केवल मंत्र जाप नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन की परीक्षा है।
यदि आप श्रद्धा, विश्वास और निरंतरता के साथ “ॐ वर्धनाय नमः” का 108 बार 21 दिन तक जाप करते हैं, तो निश्चित रूप से शिव कृपा आपके जीवन में परिवर्तन ला सकती है।