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प्रस्तावना
धरती पर जब-जब भगवान अवतरित होते हैं, तब-तब उनकी लीलाएं देवताओं को भी चकित कर देती हैं। ऐसी ही एक अद्भुत लीला है ब्रह्मा जी का अभिमान भंग। यह कथा बताती है कि परम सत्य को बुद्धि से नहीं, बल्कि भक्ति से समझा जा सकता है।
यह प्रसंग श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित है, जिसमें सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी स्वयं भगवान श्रीकृष्ण की परीक्षा लेने गोकुल आते हैं।
गोकुल में अद्भुत बालक की चर्चा
गोकुल में एक नन्हा बालक रहता था—मोरपंख धारण किए, बांसुरी बजाता, माखन चुराता और गोप-बालकों के साथ खेलता। वही थे श्रीकृष्ण।
उस समय गोकुल में चर्चा थी कि यह बालक असाधारण है। उसने पूतना, तृणावर्त और अन्य राक्षसों का वध कर दिया था। यह समाचार देवलोक तक पहुंचा।
यह सुनकर सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी के मन में जिज्ञासा जगी—
“कैसा है यह अद्भुत बालक?”
ब्रह्मा जी की परीक्षा
ब्रह्मा जी गोकुल पहुंचे। उन्होंने देखा—एक साधारण सा बालक, चारों ओर गोप-बालक, गायें और बछड़े। सब आनंद में मग्न।
ब्रह्मा जी ने सोचा—
“देखता हूं इसका चमत्कार।”
उन्होंने श्रीकृष्ण के सभी मित्रों और गायों का अपहरण कर उन्हें ब्रह्मलोक में छिपा दिया।
अब वे प्रतीक्षा करने लगे कि यह बालक क्या करेगा।
श्रीकृष्ण की अद्भुत लीला
भगवान सब जानते थे। उन्होंने समझ लिया कि यह ब्रह्मा जी की लीला है।
तब श्रीकृष्ण ने एक अद्भुत कार्य किया—
उन्होंने स्वयं ही सभी गोप-बालकों, गायों और बछड़ों का रूप धारण कर लिया।
अब गोकुल के हर घर में वही श्रीकृष्ण थे—
- कहीं बछड़ा बनकर
- कहीं गाय बनकर
- कहीं ग्वाला बनकर
- कहीं गोपी बनकर
पूरे एक वर्ष तक यह लीला चलती रही।
गोकुलवासियों को कुछ भी आभास नहीं हुआ। बल्कि उनका स्नेह और प्रेम और अधिक बढ़ गया।
ब्रह्मा जी का आश्चर्य
उधर ब्रह्मलोक में समय कुछ क्षणों जैसा बीता। ब्रह्मा जी वापस गोकुल आए।
उन्होंने देखा—
सब कुछ वैसा ही है!
गोप, ग्वाल, गायें—सब अपने स्थान पर।
वे चकित रह गए। ध्यान लगाया तो देखा—ब्रह्मलोक में भी वही सब सुरक्षित हैं।
अब वे समझ गए कि यह कोई साधारण बालक नहीं है।
विराट दर्शन
तभी श्रीकृष्ण ने अपना दिव्य रूप प्रकट किया।
ब्रह्मा जी ने देखा—
हर गोप-बालक के रूप में चार भुजाओं वाले विष्णु खड़े हैं।
तब उन्हें आभास हुआ कि यह साक्षात विष्णु ही हैं।
और जब उन्होंने चारों ओर दृष्टि डाली तो देखा—
असंख्य ब्रह्मा वहां उपस्थित हैं!
श्रीकृष्ण ने कहा—
“ब्रह्मदेव, आप तो केवल एक ब्रह्मांड के ब्रह्मा हैं। मैंने ऐसे अनगिनत ब्रह्मांड और ब्रह्मा बनाए हैं।”
ब्रह्मा जी का अभिमान भंग
ब्रह्मा जी का अभिमान चूर हो गया।
उन्होंने श्रीकृष्ण के चरणों में गिरकर क्षमा मांगी।
उन्होंने स्वीकार किया—
“हे प्रभु! मैं आपकी माया से मोहित हो गया था।”
श्रीकृष्ण ने उन्हें क्षमा कर दिया।
इस कथा से मिलने वाली शिक्षाएं
1. ईश्वर को बुद्धि से नहीं समझा जा सकता
देवताओं के देव भी उनकी लीला नहीं समझ पाए।
2. अभिमान का अंत निश्चित है
ज्ञान और पद का अहंकार भी भगवान के सामने टिक नहीं सकता।
3. भगवान भक्तों को अवसर देते हैं
श्रीकृष्ण ने स्वयं रूप धारण कर गोकुलवासियों को सेवा का अवसर दिया।
4. सच्ची भक्ति ही मार्ग है
जो प्रेम से भजता है, वही भगवान को प्राप्त करता है।
निष्कर्ष
ब्रह्मा जी का अभिमान भंग केवल एक कथा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक सत्य है।
यह लीला दर्शाती है कि भगवान अनंत हैं, उनकी शक्ति असीम है और उनकी माया अगम्य है।
गोकुल का वह नन्हा बालक वास्तव में समस्त ब्रह्मांडों का स्वामी है।
जब सृष्टिकर्ता ब्रह्मा भी उनकी महिमा न समझ पाए, तो हमें केवल भक्ति और विनम्रता का मार्ग अपनाना चाहिए।