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क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान गणेश की हर मूर्ति और चित्र में उनका एक दांत टूटा हुआ क्यों दिखाई देता है?
क्या यह सिर्फ एक परंपरा है, मूर्तिकारों की कल्पना है, या फिर इसके पीछे कोई गहरा आध्यात्मिक रहस्य छिपा है?
सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथ ब्रह्मांड पुराण में वर्णित एक अद्भुत कथा इस रहस्य से पर्दा उठाती है। यह कथा केवल एक युद्ध की नहीं, बल्कि मर्यादा, त्याग और पिता के सम्मान की है।
📖 कैलाश पर घटी वह दिव्य घटना
एक समय की बात है, जब महान योद्धा और भगवान विष्णु के अवतार परशुराम अपने गुरु भगवान शिव के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पवित्र कैलाश पर्वत पहुँचे।
उस समय महादेव और माता पार्वती विश्राम कर रहे थे। द्वार पर उनके पुत्र भगवान गणेश पहरा दे रहे थे।
जब परशुराम जी ने भीतर प्रवेश करना चाहा, तब बाल गणेश ने अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्हें रोक दिया।
⚔️ जब अहंकार टकराया कर्तव्य से
परशुराम जी अपने तेज और क्रोध के लिए विख्यात थे। एक बालक द्वारा रोका जाना उन्हें अपमानजनक लगा।
विवाद बढ़ा… और देखते ही देखते वह भयंकर युद्ध में बदल गया।
परशुराम जी ने एक के बाद एक अनेक दिव्य अस्त्र चलाए, किंतु गणेश जी ने अपनी अलौकिक शक्ति से हर प्रहार को निष्फल कर दिया।
जब परशुराम जी ने देखा कि इस बालक को परास्त करना असंभव है, तो उन्होंने अपना दिव्य अस्त्र उठाया — परशु (फरसा)।
यह कोई साधारण हथियार नहीं था। यह वही अस्त्र था जो स्वयं भगवान शिव ने उन्हें वरदान में दिया था।
🌟 त्याग का वह क्षण जिसने इतिहास बदल दिया
जैसे ही वह फरसा गणेश जी की ओर बढ़ा, उन्होंने तुरंत पहचान लिया कि यह उनके पिता का वरदान है।
वे चाहते तो उसे एक क्षण में नष्ट कर सकते थे।
परंतु उन्होंने सोचा—
“यदि मैं इस अस्त्र को निष्फल कर दूँ, तो यह मेरे पिता महादेव के वरदान और उनके भक्त का अपमान होगा।”
अपने पिता के सम्मान और अस्त्र की मर्यादा बनाए रखने के लिए, गणेश जी ने बिना प्रतिकार किए उस प्रहार को अपने बाएँ दांत पर सह लिया।
एक ही क्षण में उनका दांत टूट गया।
इसी अद्भुत त्याग और मर्यादा पालन के कारण वे “एकदंत” कहलाए।
🕉️ एकदंत का आध्यात्मिक अर्थ
भगवान गणेश का टूटा हुआ दांत केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि यह गहरे आध्यात्मिक संदेश देता है:
1️⃣ अहंकार का त्याग
टूटा हुआ दांत हमें सिखाता है कि जीवन में कभी-कभी अपने अहंकार को त्यागना ही सच्ची विजय होती है।
2️⃣ मर्यादा और सम्मान
पिता के सम्मान के लिए स्वयं कष्ट सहना — यह कर्तव्य और आदर्श का सर्वोच्च उदाहरण है।
3️⃣ अधूरे में भी पूर्णता
गणेश जी का एक दांत टूटा, पर उनकी दिव्यता पूर्ण रही।
संदेश यह है कि अपूर्णता में भी महानता छिपी होती है।
📚 अन्य मान्यताएँ
कुछ ग्रंथों में यह भी उल्लेख है कि गणेश जी ने महाभारत लिखते समय अपना दांत तोड़कर उसे लेखनी बनाया।
यह कथा उनके ज्ञान, बलिदान और समर्पण को दर्शाती है।
🔥 निष्कर्ष
भगवान गणेश का टूटा हुआ दांत कोई साधारण प्रतीक नहीं, बल्कि त्याग, मर्यादा, कर्तव्य और सम्मान का दिव्य संदेश है।
अगली बार जब आप गणेश जी की मूर्ति देखें, तो उनके उस एक दांत में छिपे इस महान त्याग को अवश्य स्मरण करें।
🙏 यदि आप भी गणेश जी के इस अद्भुत त्याग को प्रणाम करते हैं, तो कमेंट में “जय श्री गणेश” अवश्य लिखें।