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हनुमान जी केवल रामभक्त ही नहीं, बल्कि सनातन धर्म के शाश्वत रक्षक भी हैं। उनका जीवन एक ही उद्देश्य तक सीमित नहीं है।
वे शिवांश हैं, वायुपुत्र हैं, रामदूत हैं, और सात चिरंजीवियों में से एक हैं।
इस लेख में हम जानेंगे:
- हनुमान जी चिरंजीवी कैसे बने?
- क्या वे जन्म से अमर थे या वरदान मिला?
- रामायण के बाद उनका क्या पर्पस रहा?
- महाभारत में उनकी भूमिका क्या थी?
- और कल्कि अवतार तक उनका मिशन क्या है?
1. क्या हनुमान जी जन्म से चिरंजीवी थे?
हनुमान जी को “पैदाइशी चिरंजीवी” नहीं कहा जा सकता, लेकिन उनके जन्म के साथ ही दिव्य शक्तियाँ जुड़ी थीं।
वे हनुमान माने जाते हैं, जो शिव के अंशावतार हैं और वायु देव के पुत्र हैं।
बाल्यकाल से ही उनमें अद्भुत शक्ति थी। परंतु अमरत्व उन्हें एक विशेष घटना के बाद प्राप्त हुआ।
2. सूरज को फल समझकर निगलने की कथा
जब हनुमान जी बाल रूप में थे, उन्होंने सूरज को लाल फल समझ लिया। वे आकाश में उड़कर उसे खाने चल पड़े।
यह कथा हमें हनुमान चालीसा में भी संकेत रूप में मिलती है:
“युग सहस्त्र योजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू”
आश्चर्य की बात यह है कि “युग सहस्त्र योजन” की गणना आधुनिक खगोलीय दूरी के काफी निकट मानी जाती है। यह सनातन ज्ञान की वैज्ञानिक गहराई को भी दर्शाता है।
3. इंद्र का वज्र और वायु का क्रोध
जब हनुमान सूर्य की ओर बढ़े, तब देवराज इंद्र ने अपने सबसे शक्तिशाली अस्त्र “वज्र” से उन पर प्रहार किया।
हनुमान के ठोड़ी (हनु) पर चोट लगी और वे मूर्छित होकर गिर पड़े।
यहीं से उनका नाम पड़ा – हनुमान।
उनके पिता वायु देव क्रोधित हो गए और उन्होंने पूरी पृथ्वी से वायु प्रवाह रोक दिया।
सृष्टि संकट में आ गई।
4. देवताओं के वरदान और अमरत्व
सृष्टि को बचाने के लिए सभी देवता आए और हनुमान जी को अलग-अलग वरदान दिए:
- ब्रह्मा जी – अमरत्व और अजेयता
- इंद्र – वज्र से अजेय होने का वर
- वरुण – जल से सुरक्षा
- अग्नि – अग्नि से अजेयता
- यमराज – मृत्यु से मुक्ति
अंततः ब्रह्मा जी ने आशीर्वाद दिया कि वे चिरंजीवी रहेंगे।
लेकिन एक और वरदान/श्राप भी मिला —
वे अपनी शक्तियाँ भूल जाएंगे, जब तक कोई उन्हें स्मरण न कराए।
यही कारण था कि राम के आने तक वे अपनी सम्पूर्ण शक्ति से अनजान रहे।
5. रामायण में हनुमान जी का पर्पस
जब राम का अवतार हुआ, तब हनुमान जी को उनका सच्चा उद्देश्य मिला।
रामायण में उनका मुख्य कार्य था:
- सीता माता की खोज
- लंका दहन
- संजीवनी लाना
- रावण के अंत में सहयोग
उनका जीवन राम सेवा के लिए समर्पित था।
लेकिन क्या रामायण के बाद उनका कार्य समाप्त हो गया?
नहीं।
6. महाभारत में हनुमान जी की भूमिका
रामायण के बाद भी हनुमान जी जीवित रहे।
महाभारत काल में उनका उल्लेख आता है।
जब भीम वन में गए, तो उनकी भेंट हनुमान जी से हुई।
दोनों वायुपुत्र थे — भाई समान।
बाद में कृष्ण और अर्जुन हनुमान जी के पास गए और युद्ध में सहयोग मांगा।
हनुमान जी ने कहा:
“यदि मैं युद्ध में उतर गया, तो महाभारत का उद्देश्य समाप्त हो जाएगा।”
उन्होंने प्रत्यक्ष युद्ध नहीं लड़ा, बल्कि अर्जुन के रथ के ध्वज पर विराजमान हुए।
इसी कारण अर्जुन के रथ पर “कपिध्वज” था।
7. कर्ण और अर्जुन का प्रसंग
महाभारत युद्ध में एक अद्भुत दृश्य था:
- अर्जुन का तीर कर्ण के रथ को कई फीट पीछे धकेल देता था।
- कर्ण का तीर अर्जुन के रथ को केवल कुछ इंच पीछे करता था।
लेकिन कृष्ण कर्ण की प्रशंसा करते थे।
कृष्ण ने बताया:
“कर्ण जिस रथ को हिला रहा है, उस पर हनुमान विराजमान हैं।
सोचो यदि हनुमान न होते तो क्या होता?”
यह दर्शाता है कि हनुमान जी अदृश्य रूप से धर्म की रक्षा करते हैं।
8. क्या हनुमान जी शिव से भी लड़े?
पुराणों में कुछ कथाएँ मिलती हैं जहाँ हनुमान जी ने क्रोध में शिवजी का त्रिशूल निगल लिया, या सुदर्शन चक्र तक रोक लिया।
हालाँकि ये कथाएँ लोकप्रचलित हैं, लेकिन उनका मूल संदेश यह है:
हनुमान जी की शक्ति देवताओं के समान ही नहीं, बल्कि उनके सहयोगी स्तर की है।
वे शिवांश हैं, इसलिए उनके और शिव के बीच विरोध नहीं, बल्कि लीला का भाव है।
9. सात चिरंजीवी और कल्कि तक का मिशन
सनातन परंपरा के अनुसार सात चिरंजीवी माने जाते हैं:
- हनुमान
- अश्वत्थामा
- परशुराम
- विभीषण
- कृपाचार्य
- बलि
- व्यास
कहा जाता है कि जब कल्कि अवतार होगा और कलियुग का अंत होगा, तब हनुमान जी पुनः सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
उनका अंतिम पर्पस धर्म की स्थापना तक जारी रहेगा।
10. हनुमान जी का असली पर्पस क्या है?
हनुमान जी का उद्देश्य केवल रावण वध नहीं था।
उनका असली पर्पस है:
- धर्म की रक्षा
- भक्तों की सुरक्षा
- ईश्वर के कार्य में सहयोग
- युगों तक सनातन ऊर्जा को बनाए रखना
वे शक्ति हैं, भक्ति हैं और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक हैं।
निष्कर्ष
हनुमान जी चिरंजीवी इसलिए हैं क्योंकि वे केवल एक युग के लिए नहीं बने।
वे हर युग में धर्म की रक्षा के लिए उपस्थित हैं।
रामायण में वे राम के सेवक थे।
महाभारत में वे कपिध्वज बने।
और कल्कि युग में वे फिर प्रकट होंगे।
हनुमान जी केवल कथा नहीं, बल्कि सनातन ऊर्जा हैं।
FAQ
Q1. हनुमान जी चिरंजीवी क्यों हैं?
देवताओं के वरदान और ब्रह्मा जी के आशीर्वाद से वे अमर बने।
Q2. क्या हनुमान जी आज भी जीवित हैं?
मान्यता है कि वे आज भी धरती पर विद्यमान हैं और सच्चे भक्तों की रक्षा करते हैं।
Q3. महाभारत में हनुमान जी कहाँ थे?
वे अर्जुन के रथ के ध्वज पर विराजमान थे।