🛕 हनुमान जी की शक्ति का रहस्य: जब अंजनी माता ने दुनिया को दिखाया अपने पुत्र का सामर्थ्य

क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर हनुमान में इतनी अद्भुत शक्ति आई कहां से? क्या यह केवल वरदानों का परिणाम था या इसके पीछे उनकी माता की कोई दिव्य शक्ति छिपी थी?

आज हम आपको एक ऐसी भावपूर्ण कथा बताएंगे, जो भक्तों के हृदय को भाव-विभोर कर देती है। यह कथा प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश जी की वाणी से सुनी गई है, जिसमें बताया गया है कि कैसे अंजनी माता ने स्वयं अपने पुत्र की शक्ति का प्रमाण दिया।


✨ जब भगवान श्रीराम पहुंचे हनुमान जी के घर

लंका विजय के बाद जब राम पुष्पक विमान से पृथ्वी भ्रमण कर रहे थे, तब उनके साथ सीता माता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी भी थे।

इसी दौरान विमान एक स्थान के ऊपर से गुजरा। श्रीराम ने मुस्कुराकर कहा —
“हनुमान, क्या यह तुम्हारा घर नहीं है? चलो, आज तुम्हारे घर चलते हैं।”

यह सुनते ही हनुमान जी की खुशी का ठिकाना न रहा।
भला इससे बड़ा सौभाग्य क्या होगा कि स्वयं प्रभु आपके घर आएं!


🌺 अंजनी माता का आनंद

जब अंजनी माता ने देखा कि उनके द्वार पर स्वयं श्रीराम, सीता जी और लक्ष्मण जी पधारे हैं, तो उनकी आंखें आनंदाश्रुओं से भर गईं।

उन्होंने कहा —
“पुत्र हो तो ऐसा! कोई अपने माता-पिता को चारधाम यात्रा कराता है, लेकिन मेरा पुत्र तो स्वयं भगवान को मेरे घर ले आया।”

माता ने हनुमान जी को आशीर्वाद दिया —
“ऐसा पुत्र सबको मिले।”


🔥 जब माता ने पूछा सबसे बड़ा प्रश्न

हनुमान जी ने माता को पूरी लंका विजय की कथा सुनाई —
कैसे रावण का वध हुआ, कैसे युद्ध हुआ।

लेकिन माता प्रसन्न नहीं हुईं।

उन्होंने गंभीर स्वर में पूछा —
“हनुमान, तुम्हारे होते हुए श्रीराम को युद्ध करने की आवश्यकता ही क्यों पड़ी?”

“तुम अपना शरीर बढ़ाकर पूरी लंका को पाताल में दबा सकते थे। फिर प्रभु को इतना कष्ट क्यों दिया?”

वहां उपस्थित लक्ष्मण जी यह सुनकर चकित रह गए। उन्हें लगा कि यह अतिशयोक्ति है।


🌋 अंजनी माता ने दिखाया प्रमाण

माता के हृदय में अपने पुत्र की शक्ति पर अटूट विश्वास था।
वह सामने के एक विशाल पर्वत पर चढ़ गईं।

फिर उन्होंने अपने पुत्र के बाल्यकाल को स्मरण किया —
वह छोटा सा हनुमान, जो सूर्य को फल समझकर निगलने चला गया था।

ममता उमड़ पड़ी…

माता के स्तनों से दूध की धारा फूट पड़ी।

उस दूध की एक बूंद पर्वत पर गिरी —
और देखते ही देखते वह पर्वत भयंकर गर्जना के साथ फट पड़ा।
आकाश काला हो गया। धरती कांप उठी।

माता बोलीं —
“देखो, इस दूध की एक बूंद ने पर्वत की यह दशा कर दी।
मैंने किसी पुरुष को नहीं छुआ। यह शक्ति पवित्र मातृत्व की है।
और इसी दूध को पीकर मेरा पुत्र बड़ा हुआ है।”


🕉️ इस कथा का आध्यात्मिक अर्थ

यह कथा हमें कई गहरे संदेश देती है —

1️⃣ मातृत्व की शक्ति असीम होती है

मां का आशीर्वाद और उसका प्रेम संतानों को असाधारण बना देता है।

2️⃣ हनुमान की विनम्रता

हनुमान जी चाहते तो अकेले ही लंका नष्ट कर सकते थे,
लेकिन उन्होंने सब श्रेय अपने प्रभु को दिया।

3️⃣ सच्ची भक्ति क्या है?

शक्ति होने के बावजूद स्वयं को दास मानना — यही हनुमान की महानता है।


🛑 क्या वास्तव में हनुमान जी सर्वशक्तिमान थे?

धार्मिक ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि हनुमान जी को ब्रह्मा, शिव, इंद्र सहित अनेक देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त था।
वे अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता माने जाते हैं।

उनकी शक्ति केवल शारीरिक नहीं थी, बल्कि आध्यात्मिक और मानसिक भी थी।


📿 निष्कर्ष

हनुमान जी की शक्ति केवल वरदानों की देन नहीं थी,
वह उनकी माता अंजनी के पवित्र प्रेम और संस्कारों का परिणाम थी।

यह कथा हमें सिखाती है —
👉 माता का सम्मान करो
👉 शक्ति का उपयोग विनम्रता से करो
👉 और सच्चे भक्त बनो

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