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प्रस्तावना: जहां तर्क रुक जाता है और श्रद्धा शुरू होती है
साल 1998।
एक रिटायर्ड आर्मी कर्नल की निजी डायरी में लिखे कुछ शब्द आज भी पढ़ने वालों की रूह कंपा देते हैं।
वो रात थी –
तापमान -20°
समय – 3:17 AM
स्थान – Mount Kailash
बर्फीली वादियों के बीच खड़ा एक ऐसा पर्वत जिसे दुनिया जीत नहीं पाई। जिसे चढ़ा नहीं जाता… जिसकी परिक्रमा की जाती है।
हिंदू धर्म में इसे भगवान शिव का निवास माना जाता है।
बौद्ध इसे ब्रह्मांड का केंद्र कहते हैं।
जैन परंपरा में यह मोक्ष का स्थल है।
लेकिन उस रात…
एक सैनिक की तर्कशक्ति कांप गई थी।
कैलाश: सिर्फ एक पर्वत नहीं, एक धुरी
तिब्बत की बर्फीली भूमि में स्थित Mount Kailash समुद्र तल से लगभग 6638 मीटर ऊँचा है।
यह दुनिया का सबसे रहस्यमयी पर्वत माना जाता है।
अजीब बात यह है कि आज तक कोई भी इसकी चोटी तक नहीं पहुंच पाया।
वैज्ञानिक कहते हैं –
“यह धार्मिक प्रतिबंधों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण है।”
श्रद्धालु कहते हैं –
“यह अनुमति का विषय है। बुलावा हो तभी संभव है।”
कर्नल अरविंद राठौर – एक तर्कवादी सैनिक
उनका नाम था –
कर्नल अरविंद राठौर
45 वर्ष की उम्र
अनुशासन में ढले हुए
युद्ध के अनुभवी
तर्क और विज्ञान में विश्वास रखने वाले
उन्होंने अंधविश्वासों को हमेशा चुनौती दी थी।
रिटायरमेंट के बाद उन्होंने कहा –
“अगर कोई रहस्य है… तो उसका उत्तर होना चाहिए।”
उन्होंने एक छोटा दल बनाया:
- एक स्थानीय गाइड
- दो पोर्टर
- और उनका भरोसेमंद कैमरा
यात्रा शुरू हुई Lake Manasarovar तक।
पहले दो दिन सब सामान्य रहा।
लेकिन तीसरे दिन… हवा बदल गई।
डायरी का पहला संकेत: “कोई हमें देख रहा है…”
डायरी में लिखा था:
“दोपहर के समय मुझे लगा जैसे कोई हमें देख रहा हो।
दूर-दूर तक सिर्फ बर्फ थी।
लेकिन निगाहों का एहसास स्पष्ट था।”
शाम होते-होते उनका कंपास घूमने लगा।
GPS सिग्नल गायब।
गाइड ने धीरे से कहा:
“साहब, यहां रात में बाहर मत निकलना… पहाड़ जागता है।”
कर्नल मुस्कुराए।
“पहाड़ नहीं जागते… लोग कहानियां बनाते हैं।”
लेकिन वो रात कहानी नहीं थी।
3:17 AM – वो क्षण जो आज भी सवाल है
रात 3:17
पहले हल्की सरसराहट।
फिर बर्फ पर दबते कदमों की आवाज।
धीरे… भारी…
जैसे कोई टेंट के चारों ओर घूम रहा हो।
कर्नल ने घड़ी देखी।
दिल की धड़कन तेज।
उन्होंने टॉर्च उठाई।
जिप खोली।
बाहर… कुछ नहीं।
लेकिन बर्फ पर स्पष्ट पदचिन्ह थे।
मानव जैसे।
लेकिन सामान्य से बड़े।
और सबसे अजीब बात –
वे टेंट के चारों ओर घूमते हुए अचानक समाप्त हो गए।
ना आगे।
ना पीछे।
बस… वहीं खत्म।
नीली रोशनी – प्राकृतिक या दिव्य?
डायरी का अगला पन्ना कांपते अक्षरों में था:
“अचानक हवा बिल्कुल शांत हो गई।
ऐसा लगा जैसे पूरी घाटी मुझे देख रही हो।”
दूर पहाड़ की ढलान पर एक हल्की नीली रोशनी दिखाई दी।
स्थिर… लेकिन धड़कती हुई।
जैसे सांस ले रही हो।
उन्होंने कैमरा उठाया।
बैटरी 100%
जैसे ही शटर दबाया –
बैटरी पूरी तरह खत्म।
ठंड से नहीं।
समझ से बाहर।
अगली सुबह – सब सामान्य, लेकिन कुछ बदल चुका था
सूरज निकला।
बर्फ साफ।
कोई पदचिन्ह नहीं।
कोई रोशनी नहीं।
लेकिन कर्नल की आंखों में अब जिद नहीं… आदर था।
उन्होंने वापसी के बाद किसी से कुछ नहीं कहा।
सिर्फ डायरी में लिखा:
“कुछ स्थानों को जीतने के लिए नहीं बनाया गया।
कुछ को समझने के लिए भी नहीं।
कुछ शक्तियां सिर्फ महसूस की जा सकती हैं।”
समय का रहस्य – क्या कैलाश में समय अलग चलता है?
कुछ यात्रियों ने दावा किया कि उनके बाल और नाखून असामान्य गति से बढ़े।
कुछ ने कहा कि घड़ियां असामान्य व्यवहार करती हैं।
वैज्ञानिक इसे ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी और मानसिक प्रभाव बताते हैं।
लेकिन सवाल फिर भी बाकी है –
क्या सिर्फ शरीर प्रभावित होता है… या चेतना भी?
6 महीने बाद – और फिर अचानक…
कर्नल 3:17 AM पर अक्सर जागने लगे।
6 महीने बाद उन्होंने फिर जाने की योजना बनाई।
लेकिन यात्रा से एक सप्ताह पहले उन्हें हल्का स्ट्रोक आया।
योजना रद्द।
उन्होंने फिर कभी कैलाश का नाम नहीं लिया।
डायरी का आखिरी वाक्य था:
“वो रोशनी मुझे बुला रही थी…”
वैज्ञानिक दृष्टिकोण बनाम श्रद्धा
क्या वो रोशनी St. Elmo’s Fire जैसी प्राकृतिक विद्युत घटना थी?
कोई दुर्लभ प्लाज्मा डिस्चार्ज?
या सच में कोई दिव्य संकेत?
विज्ञान उत्तर खोज रहा है।
श्रद्धालु कहते हैं –
“जहां शिव हैं, वहां तर्क समाप्त हो जाता है।”
क्या कैलाश अपना रहस्य छुपाए रखता है?
Mount Kailash आज भी अछूता है।
कोई शिखर पर नहीं पहुंचा।
कोई आधिकारिक चढ़ाई सफल नहीं हुई।
क्यों?
धार्मिक सम्मान?
प्राकृतिक कठिनाई?
या कुछ और?
निष्कर्ष: रहस्य का उत्तर जरूरी नहीं
कर्नल अरविंद राठौर एक सैनिक थे।
वो उत्तर खोजने गए थे।
उन्हें उत्तर नहीं मिला।
उन्हें अनुभव मिला।
कभी-कभी जीवन में कुछ प्रश्नों का उत्तर नहीं होता।
सिर्फ मौन होता है।
और उस मौन में…
शायद शिव की उपस्थिति।
🙏 आपकी आस्था क्या कहती है?
क्या वो रोशनी प्राकृतिक थी?
या दिव्य संकेत?
अगर आपको लगता है कि इस दुनिया में अभी भी कुछ ऐसा है जो विज्ञान से परे है…
कमेंट में लिखिए – हर हर महादेव।
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अगली कहानी में हम बताएंगे कैलाश पर हुई तीन और घटनाएं जिनका रिकॉर्ड आज भी मौजूद है।
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हर हर महादेव। 🕉️