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🌸 राधा रानी की अद्भुत प्रकट लीला
भक्ति परंपरा में राधा रानी को साधारण बालिका नहीं माना जाता। वे स्वयं भगवान की आह्लादिनी शक्ति हैं। जहां भगवान अवतार लेते हैं, वहीं राधा रानी अवतार नहीं बल्कि “अवतरित” होती हैं — अर्थात वे किसी साधारण गर्भ से उत्पन्न नहीं होतीं, बल्कि दिव्य रूप से प्रकट होती हैं।
👑 वृषभानु और माता कीर्ति की संताप भरी प्रार्थना
वृषभानु और माता कीर्ति उस समय के प्रतिष्ठित राजा थे। धन, वैभव, सम्मान सब कुछ था, परंतु एक संतान का अभाव उनके जीवन में गहरा दुःख बन गया था।
माता कीर्ति प्रतिदिन यमुना से प्रार्थना करतीं —
“हे यमुना महारानी! मुझे एक संतान प्रदान कीजिए।”
उनकी प्रार्थना वर्षों तक चलती रही।
🌊 कमल से प्रकट हुई दिव्य बालिका
एक दिन प्रातःकाल माता कीर्ति स्नान हेतु यमुना तट पर गईं। उन्होंने देखा कि यमुना जी की धारा के विपरीत दिशा में एक विशाल कमल का पुष्प बहता हुआ आ रहा है।
वह कमल धीरे-धीरे उनके समीप पहुंचा। उसके भीतर अद्भुत प्रकाश था। जैसे ही कमल माता कीर्ति के निकट आया, उसकी पंखुड़ियां स्वयं खुल गईं।
और उस कमल के मध्य विराजमान थीं —
अनंत ब्रह्मांड की सर्वेश्वरी, श्री राधा रानी।
माता कीर्ति उन्हें देखकर स्तब्ध रह गईं। शब्द जैसे थम गए। वे आनंद और विस्मय से भरकर उस दिव्य बालिका को अपनी गोद में उठा लेती हैं।
🎉 महल में उत्सव का माहौल
माता कीर्ति दौड़कर राजा वृषभानु के पास गईं —
“देखिए! यमुना महारानी ने हमें संतान दी है!”
राजा वृषभानु जैसे आनंद से पागल हो गए। वे महल में घोषणा करने लगे —
“हमारी पुत्री आई है! उत्सव मनाओ!”
पूरा राज्य आनंद में डूब गया।
👁 लेकिन राधा रानी ने नहीं खोली आंखें
कुछ समय बाद सभी को ध्यान आया कि बालिका ने अपनी आंखें नहीं खोली हैं। वैद्य को बुलाया गया। वैद्य ने कहा —
“इनकी आंखें खुली नहीं हैं।”
क्षणभर के लिए चिंता हुई, परंतु राजा वृषभानु ने कहा —
“जैसी भी हैं, ये हमारी प्रिय पुत्री हैं।”
समय बीतता गया। राधा रानी बड़ी होती रहीं, परंतु उनके नेत्र बंद ही रहे।
🪔 श्रीकृष्ण का जन्म
उधर मथुरा में देवकी और वसुदेव के यहां वह दिव्य क्षण आया जिसका वर्षों से इंतजार था।
श्रीकृष्ण ने अवतार लिया।
वसुदेव जी बालक कृष्ण को लेकर गोकुल पहुंचे और उन्हें नंद बाबा के यहां सौंप दिया।
वहां उत्सव मनाया जाने लगा। ढोल-नगाड़े बजने लगे। गोकुल आनंद में डूब गया।
🌺 राधा-कृष्ण का प्रथम मिलन
उत्सव का निमंत्रण राजा वृषभानु को भी मिला। वे माता कीर्ति और अपनी लाडो रानी के साथ गोकुल पहुंचे।
एक ओर सजे-धजे यशोदा और नंद बाबा थे।
दूसरी ओर पालने में झूल रहे थे बाल कृष्ण।
तभी माता कीर्ति की गोद में बैठी राधा रानी छटपटाने लगीं।
वे नीचे उतरीं। पहली बार पृथ्वी पर अपने चरण रखे। घुटनों के बल चलती हुईं वे सीधे उस पालने तक पहुंचीं जहां कृष्ण लेटे थे।
कृष्ण ने अपनी आंखें बंद कर रखी थीं।
जैसे ही राधा रानी पालने के पास पहुंचीं —
कृष्ण ने नेत्र खोले।
और उसी क्षण…
राधा रानी की आंखें भी खुल गईं।
💞 क्यों नहीं खोली थीं राधा जी ने आंखें?
भक्ति परंपरा कहती है —
राधा रानी ने प्रण लिया था कि वे इस संसार में सबसे पहले उसी को देखेंगी जो उनके प्राणवल्लभ हैं।
और वह थे — श्रीकृष्ण।
इसलिए उन्होंने जन्म के बाद आंखें नहीं खोलीं।
पहली दृष्टि केवल कृष्ण पर ही पड़ी।
✨ आध्यात्मिक अर्थ
यह कथा केवल भावनात्मक नहीं, गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य भी बताती है —
- राधा शक्ति हैं, कृष्ण शक्तिमान।
- राधा प्रेम हैं, कृष्ण प्रेम के आश्रय।
- राधा बिना कृष्ण अधूरे, कृष्ण बिना राधा अधूरे।
राधा रानी का कमल से प्रकट होना यह दर्शाता है कि वे सांसारिक नियमों से परे हैं।
उनका नेत्र खोलना यह बताता है कि सच्चा प्रेम केवल भगवान में ही है।
🌼 निष्कर्ष
राधा रानी की यह जन्म कथा हमें सिखाती है कि
जब भक्ति सच्ची हो, तो भगवान स्वयं प्रकट होते हैं।
राधा रानी ने इस पृथ्वी पर सबसे पहले श्रीकृष्ण को देखा —
और उसी क्षण से प्रेम की पराकाष्ठा का आरंभ हुआ।