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📅 यम द्वितीया 2025 की तिथि
- तारीख: 23 अक्टूबर 2025 (गुरुवार)
- द्वितीया तिथि प्रारंभ: 22 अक्टूबर 2025, रात 08:16 बजे
- द्वितीया तिथि समाप्त: 23 अक्टूबर 2025, रात 10:46 बजे
- पूजन मुहूर्त: दोपहर 12:57 से 03:10 बजे तक (स्थानीय पंचांग अनुसार)
🌼 यम द्वितीया क्या है?
दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाने वाला यम द्वितीया या भाई दूज एक ऐसा पर्व है जो भाई-बहन के पवित्र संबंध को समर्पित है।
इस दिन बहनें अपने भाइयों का तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं और उनके दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं।
यह पर्व यमराज और यमुना की कथा से जुड़ा हुआ है, इसी कारण इसे “यम द्वितीया” कहा जाता है।
“भाई दूज का त्योहार है प्यारा,
बहन का स्नेह है सबसे न्यारा।
तिलक से बढ़ता है विश्वास,
सदा रहे भाई-बहन का साथ।”
🕉️ यम द्वितीया क्यों मनाई जाती है? (पौराणिक कथा)
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, सूर्य देव के दो संतानें थीं — यमराज और यमुना।
यमुना अपने भाई यमराज से बहुत स्नेह करती थीं और अक्सर उन्हें अपने घर आने के लिए आमंत्रित करती थीं।
एक दिन यमराज अपनी बहन के घर पहुँचे। यमुना ने प्रेमपूर्वक उनका स्वागत किया, स्नान कराया, तिलक किया और स्वादिष्ट भोजन परोसा।
यमराज उसकी भक्ति और प्रेम से प्रसन्न हुए और कहा —
“जो भाई आज के दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा,
उसे मेरे लोक का भय कभी नहीं रहेगा।”
तभी से यह दिन “यम द्वितीया” कहलाया और इसे भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक माना गया।
🪔 पूजा विधि
- सुबह स्नान कर पवित्र वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को साफ करके दीपक जलाएं।
- भाई को आसन पर बैठाकर तिलक करें —
- तिलक में रोली, अक्षत, दूर्वा और चावल का प्रयोग करें।
- आरती करें और मिठाई खिलाएं।
- भाई बहन को वस्त्र, उपहार या दक्षिणा दे।
- अंत में दोनों साथ भोजन करें।
🌸 यम द्वितीया का महत्व
- यह दिन भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का संदेश देता है।
- यमराज की पूजा से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
- इस दिन बहन के हाथों तिलक कराने से भाई को दीर्घायु और यश की प्राप्ति होती है।
- परिवार में सौहार्द, एकता और सुख-समृद्धि बढ़ती है।
🌷 भाई दूज और यम द्वितीया में अंतर
दोनों एक ही दिन मनाए जाते हैं — फर्क केवल क्षेत्रीय नाम का है।
उत्तर भारत में इसे भाई दूज, जबकि शास्त्रों में इसे यम द्वितीया कहा गया है।
💬 सुंदर श्लोक / संदेश
“यमुना तिलक करे यमराज का,
स्नेह से भर दे संसार सारा।
बहन का प्रेम अमर रहे सदा,
यही आशीष दे यह पर्व हमारा।”
📍 क्षेत्र-विशिष्ट सुझाव
- यदि आप बिहार/उत्तर भारत में हैं (जैसे आप Bihār Sharīf में), तो आपके स्थान के अनुसार स्थानीय पंडित या पंचांग देखें — क्यों कि मुहूर्त थोड़ा भिन्न हो सकता है।
- शुभ मुहूर्त से पहले स्नान, साफ-सफाई और घर की सज्जा कर लें।
- तिलक एवं आरती की थाली तैयार रखें — रोली, अक्षत (चावल), दूर्वा, मिठाई आदि।
- भाई को बुलाने और बहन द्वारा तिलक करने का समय मुहूर्त में करें तो ज्यादा शुभ माना जाता है।
📿 निष्कर्ष
यम द्वितीया केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम, सुरक्षा और अपनत्व की भावना का प्रतीक है।
यह दिन हमें सिखाता है कि जीवन में रिश्तों का स्नेह ही सबसे बड़ा धन है।