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क्या आपने कभी अपनी उंगली से डमरू का आकार बनाया है?
ज़रा कल्पना कीजिए – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग… और फिर वापस सतयुग।
यह जो चक्र बनता है, वह बिल्कुल डमरू जैसा दिखाई देता है। और यदि आप उसी आकृति पर तेज़ी से पेन चलाएँ, तो उसके कोने गोल होते जाते हैं और अंत में वह बन जाता है ∞ (इन्फिनिटी) – यानी अनंत, जो कभी समाप्त नहीं होता।
यही है सनातन धर्म का कालचक्र — जो चलता रहता है, बिना रुके, बिना थमे।
🕉️ युग चक्र क्या है?
हिंदू धर्म में समय को चार भागों में बाँटा गया है:
- सतयुग
- त्रेतायुग
- द्वापरयुग
- कलियुग
इन चारों युगों का क्रम बार-बार दोहराया जाता है। जैसे ही कलियुग समाप्त होता है, फिर से सतयुग का आरंभ हो जाता है।
यह प्रक्रिया ठीक वैसी ही है जैसे एक आर-ग्लास (Hourglass) में रेत ऊपर से नीचे गिरती है। जब पूरी रेत नीचे आ जाती है, तो हम उसे पलट देते हैं — और वही रेत फिर ऊपर से नीचे गिरने लगती है।
यानी समय खत्म नहीं होता, वह सिर्फ रूप बदलता है।
🔔 डमरू और कालचक्र का गहरा संबंध
भगवान शिव का डमरू केवल एक वाद्ययंत्र नहीं है।
वह सृष्टि और प्रलय का प्रतीक है।
जब डमरू बजता है, तो एक ओर से दूसरी ओर कंपन होता है — ऊपर-नीचे, इधर-उधर।
ठीक वैसे ही युग बदलते रहते हैं:
- कभी धर्म ऊपर
- कभी अधर्म ऊपर
यह ऊपर-नीचे का खेल ही सृष्टि का संतुलन बनाए रखता है।
🔄 इन्फिनिटी (∞) का आध्यात्मिक अर्थ
इन्फिनिटी का चिन्ह जब सीधा खड़ा किया जाता है तो वह आर-ग्लास बन जाता है।
यह दर्शाता है:
- समय बहता रहता है
- युग बदलते रहते हैं
- सृष्टि समाप्त होकर फिर शुरू होती है
कलियुग अंत नहीं है — यह सिर्फ एक चरण है।
🌅 कलियुग के बाद क्या होगा?
जब कलियुग समाप्त होगा, तब फिर से सतयुग आरंभ होगा।
लेकिन उस समय न आप होंगे, न मैं।
सतयुग में:
- धर्म 100% स्थापित होगा
- मानव जीवन पवित्र और सात्विक होगा
- सत्य और करुणा का वास होगा
- प्रकृति संतुलित होगी
🐟 विष्णु के दशावतार और युगों का विभाजन
भगवान विष्णु के दशावतार का संबंध भी युगों से जुड़ा है।
दशावतार को 1-2-3-4 में नहीं, बल्कि 4-3-2-1 के क्रम में समझा जाता है।
✨ सतयुग – 4 अवतार
- मत्स्य
- कूर्म
- वराह
- नरसिंह
✨ त्रेतायुग – 3 अवतार
- वामन
- परशुराम
- श्रीराम
✨ द्वापरयुग – 2 अवतार
- बलराम
- श्रीकृष्ण
✨ कलियुग – 1 अंतिम अवतार
- कल्कि
कलियुग के अंत में भगवान का अंतिम अवतार होगा:
👉 कल्कि
जो अधर्म का विनाश करके फिर से सतयुग की स्थापना करेंगे।
🔥 कल्कि अवतार का रहस्य
पुराणों के अनुसार:
- कल्कि सफेद घोड़े पर सवार होंगे
- हाथ में तलवार होगी
- अधर्मियों का नाश करेंगे
- धर्म की पुनः स्थापना करेंगे
और फिर समय का चक्र दोबारा शुरू होगा — सतयुग के साथ।
🌌 युगों की वैज्ञानिक व्याख्या
अगर हम इसे प्रतीकात्मक रूप से देखें, तो:
- सतयुग = मानव चेतना का उच्चतम स्तर
- त्रेता = थोड़ी गिरावट
- द्वापर = संतुलन
- कलियुग = नैतिक पतन
फिर आत्मशुद्धि और दिव्य परिवर्तन के बाद पुनः उच्च चेतना का उदय होता है।
यह चक्र केवल ब्रह्मांड में नहीं, बल्कि हर इंसान के जीवन में भी चलता है।
🧘 निष्कर्ष: समय कभी समाप्त नहीं होता
डमरू का आकार, इन्फिनिटी का चिन्ह और आर-ग्लास — तीनों हमें एक ही बात समझाते हैं:
👉 समय अनंत है।
👉 कलियुग अंत नहीं, परिवर्तन है।
👉 सतयुग अवश्य लौटेगा।
भगवान शिव का डमरू हमें याद दिलाता है कि सृष्टि का खेल चलता रहेगा — ऊपर से नीचे, फिर नीचे से ऊपर।