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🔱 प्रस्तावना: क्यों विशेष है भानु सप्तमी?
हिंदू धर्म में सूर्य देव केवल एक ग्रह नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष देवता माने गए हैं।
ऐसे देवता जिन्हें हम प्रतिदिन अपनी आँखों से देख सकते हैं, जिनकी ऊर्जा से पृथ्वी पर जीवन संभव है।
जब सप्तमी तिथि और रविवार का पवित्र संयोग बनता है, तब जो व्रत आता है उसे भानु सप्तमी कहा जाता है।
यह व्रत आरोग्य, आत्मबल, मान-सम्मान, पितृ कृपा और जीवन में स्थिरता प्रदान करता है।
📅 8 फरवरी 2026, रविवार को यह अत्यंत शुभ पर्व मनाया जाएगा।
🌞 भानु सप्तमी क्या है? (What is Bhanu Saptami)
भानु का अर्थ है सूर्य
सप्तमी सूर्य देव की प्रिय तिथि मानी जाती है
👉 जब सप्तमी तिथि रविवार को आती है, तब वह दिन भानु सप्तमी कहलाता है।
यह व्रत विशेष रूप से:
- सूर्य दोष
- पितृ दोष
- रोग बाधा
- सरकारी कार्यों में अड़चन
- आत्मविश्वास की कमी
को दूर करने के लिए किया जाता है।
📅 भानु सप्तमी 2026 – तिथि और पंचांग
- 📆 दिन: रविवार
- 🗓️ तिथि: कृष्ण पक्ष सप्तमी
- 🌅 देवता: सूर्य देव
- 🕉️ व्रत प्रकार: फलाहार / जलाहार (इच्छानुसार)
🔱 सूर्य देव का पौराणिक महत्व
शास्त्रों में सूर्य को कहा गया है:
“नमः सूर्याय शाश्वताय”
सूर्य देव:
- नवग्रहों के राजा
- आत्मा के कारक
- राजसत्ता, तेज और आत्मसम्मान के दाता
- पिता के प्रतीक
रामायण में श्रीराम ने लंका युद्ध से पहले
👉 आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ किया था
जिससे उन्हें विजय प्राप्त हुई।
🌞 भानु सप्तमी का आध्यात्मिक महत्व
भानु सप्तमी केवल पूजा नहीं, बल्कि:
- आत्मशुद्धि
- कर्म सुधार
- जीवन दिशा स्पष्ट करने का दिन
माना जाता है कि इस दिन सूर्य उपासना से:
- आत्मा जाग्रत होती है
- नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है
- जीवन में “प्रकाश” आता है
🪔 भानु सप्तमी पूजा विधि (विस्तृत)
🌅 1. प्रातःकाल तैयारी
- ब्रह्ममुहूर्त में उठें
- स्नान करें
- लाल / केसरिया वस्त्र पहनें
🌞 2. सूर्य को अर्घ्य विधि
- तांबे का लोटा लें
- उसमें जल, लाल फूल, अक्षत, रोली डालें
- सूर्य की ओर मुख करके अर्घ्य दें
🕉️ मंत्र
ॐ घृणि सूर्याय नमः
(7 या 11 बार)
📿 भानु सप्तमी व्रत कथा (पूर्ण)
प्राचीन काल में एक राजा गंभीर रोग से पीड़ित हो गया।
राज्य वैभव होते हुए भी उसका जीवन अंधकार में था।
ऋषियों ने उसे भानु सप्तमी व्रत का विधान बताया।
राजा ने श्रद्धा से सूर्य पूजा की, दान किया और सत्य का पालन किया।
👉 कुछ ही समय में:
- रोग समाप्त हुआ
- राज्य में शांति आई
- राजा का यश बढ़ा
तभी से यह व्रत रोग नाशक और भाग्यवर्धक माना गया।
🌞 भानु सप्तमी और ज्योतिष शास्त्र
सूर्य कमजोर हो तो:
- आत्मविश्वास गिरता है
- नौकरी में समस्या
- पिता से मतभेद
- आंखों और हड्डियों की समस्या
👉 भानु सप्तमी से सूर्य मजबूत होता है
विशेष रूप से:
- सिंह लग्न
- सूर्य महादशा
- सरकारी नौकरी वाले लोग
के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी है।
🧠 भानु सप्तमी: वैज्ञानिक दृष्टिकोण
आधुनिक विज्ञान भी मानता है:
- सूर्य से मिलने वाला प्रकाश Vitamin D देता है
- सुबह की धूप मानसिक स्वास्थ्य सुधारती है
- सूर्य नमस्कार से हार्मोन संतुलन होता है
👉 यानी भानु सप्तमी =
आध्यात्म + विज्ञान का अद्भुत संगम
🌾 भानु सप्तमी पर दान का महत्व
दान में श्रेष्ठ:
- गेहूं
- गुड़
- तांबा
- लाल वस्त्र
- अन्न
दान करने से:
- सूर्य कृपा बढ़ती है
- पितृ दोष शांत होता है
❌ क्या न करें
- सूर्य को पीठ दिखाकर अर्घ्य
- क्रोध
- झूठ
- आलस्य
- अपवित्र अवस्था में पूजा
🌺 भानु सप्तमी के चमत्कारी लाभ
✔ रोगों से मुक्ति
✔ सरकारी कार्यों में सफलता
✔ मान-सम्मान
✔ जीवन में स्थिरता
✔ आत्मबल और सकारात्मकता
🙏 निष्कर्ष
भानु सप्तमी केवल एक व्रत नहीं,
यह जीवन में प्रकाश लाने का माध्यम है।
जो व्यक्ति श्रद्धा से सूर्य देव की उपासना करता है,
उसका जीवन अंधकार से उजाले की ओर बढ़ता है 🌞